Aukaat | औकात
पूरे मंडप के सामने…शहनाई की आवाज के बीच…एक दूल्हे को उसकी “औकात” बता दी गई। रिया ने सबके सामने कहा —“साले गरीब… मेरी जूती साफ करने वाले।” उस पल शिव की शादी नहीं टूटी…उसका बचपन टूटा, उसके पिता का गर्व टूटा, उसकी मां की आंखों की रोशनी टूटी। लेकिन कुछ अपमान इंसान को खत्म नहीं करते —उसे खतरनाक बना देते हैं। दो साल बाद… वही लड़का5000 करोड़ की कंपनी का मालिक बनकरउसी शहर में लौटता है। वही कंपनी खरीदने के लिए…जहां कभी उसे ठुकराया गया था। बदला लिया जाता है।कुर्सियां छिनती हैं।औकात बदलती है। लेकिन जब सब कुछ जीत लिया जाता है —तब सबसे बड़ा सवाल उठता है… क्या बदला सच में जीत है? “औकात” सिर्फ पैसे की कहानी नहीं है।यह आत्मसम्मान, मेहनत, और माफी की कहानी है।जहां असली जीत किसी को गिराने में नहीं — खुद को उठाने में है।
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