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Collector Sahiba | कलेक्टर साहिबा

शहर के सबसे महंगे होटल मेंसादे कपड़ों में बैठा एक परिवार… और सामने खड़े कुछ पुराने कॉलेज दोस्तजो अब भी कपड़ों से औकात मापते हैं। उन्हें क्या पता—वही लड़की, जो कभी स्कॉलरशिप पर पढ़ती थी,जिसका मज़ाक उसके डिब्बे, उसके कपड़ों और उसके सपनों पर उड़ाया जाता था… आज उसी जिले की कलेक्टर बन चुकी है। लेकिन असली कहानी उसकी पोस्ट की नहीं,उसकी सोच की है। जब होटल मैनेजर ने उसे सीट छोड़ने को कहा…जब दोस्तों ने उसे “मिडिल क्लास” कहकर हंसी उड़ाई…तब उसने अपना परिचय नहीं दिया। वह इंतज़ार करती रही…कि लोग उसे इंसान समझें या स्टेटस? “Izzat”एक ऐसी कहानी है जहाँ बदला नहीं लिया जाता,आईना दिखाया जाता है। जहाँ जीत रैंक की नहीं,चरित्र की होती है।

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  • Feb 2026
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