DM Sahiba | डीएम साहिबा
जिले की सबसे ताकतवर कुर्सी पर बैठी थीडीएम मीरा सिंघानिया। रोब… सत्ता… आदेश…एक घंटी की आवाज पर लोग दौड़ते थे। लेकिन उस दिनएक बूढ़ा चपरासीतीन बार घंटी सुनकर भी देर से पहुंचा… और अगले ही पलएक थप्पड़ गूंजा पूरे कमरे में। वो थप्पड़ सिर्फ एक इंसान पर नहीं पड़ा था—वो पड़ा था त्याग पर।वो पड़ा था प्रेम पर।वो पड़ा था उस नींव परजिस पर मीरा की पूरी कामयाबी खड़ी थी। जब जमीन पर गिरे उस बूढ़े के हाथ सेपुराना तांबे का सिक्का दिखा… जब हथेली का जला हुआ निशान पहचान में आया… तब सत्ता का नशा टूट गया। वो चपरासी कोई और नहीं—मीरा का पति रघु था। जिसने जमीन बेची…घर गिरवी रखा…पत्थर तोड़े…भूखा सोया…ताकि उसकी पत्नी “कलेक्टर” बन सके। लेकिन आजवही पतिउसके ऑफिस में पानी पिला रहा था। “DM Sahiba”एक कहानी है उस थप्पड़ कीजो घमंड पर पड़ाऔर उस माफी कीजिसने रिश्ते बचा लिए।
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