Do Kaudi Ka Damad | दो कौड़ी का दामाद
कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन की भीड़ मेंएक कुली…और एक दुल्हन। नंदिनी — करोड़पति राय साहब की बेटी,जिसकी शादी उसकी मर्जी के खिलाफ तय कर दी गई थी। भागती हुई, डर से कांपती हुई,वो एक अजनबी कुली से टकराती है। “मुझे बचा लो… मुझसे शादी कर लो।” और उसी प्लेटफॉर्म पर,सैकड़ों लोगों के सामनेएक कुली उसकी मांग भर देता है। राय साहब अपनी बेटी को मरा हुआ घोषित कर देते हैं।लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। हवेली में शुरू होता है अपमान का सिलसिला —दामाद नहीं, नौकर।कुर्सी नहीं, स्टोर रूम।इज्जत नहीं, ताने। लेकिन जिस इंसान को वो पत्थर समझकर ठोकर मार रहे थे…वो असल में एक हीरा था। एक फोन कॉल…“Head Office – New York” और सबकी औकात सामने आ गई। Heeraएक कहानी है पहचान की…जहां कपड़े छोटे थे,लेकिन किरदार बहुत बड़ा।
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