From Servant to CEO | नौकर से सीईओ
तुम्हारी जगह मेरे पैरों में है…” बस एक वाक्य…और एक रिश्ते की नींव हिल गई। ईशा रॉय — शहर की सबसे घमंडी बिजनेस वुमन।कबीर — उसका पति… जिसे वो नौकर से भी बदतर समझती थी। सबके सामने जलील किया।सैंडल साफ करने को कहा।घर से निकाल दिया। लेकिन उस रात… बारिश में भीगा वो “नौकर”ब्लैक Rolls Royce में बैठकरअपने असली नाम से फोन करता है — कबीर सिंघानियाCEO — Empire Group अगली सुबह…औकात बदल चुकी थी। जिसे वो वेटर बनाती थी,वही उसे अपने घर में नौकरानी बनाकर रखता है। लेकिन ये कहानी सिर्फ बदले की नहीं है…ये कहानी है घमंड टूटने की,इंसान बदलने की,और असली अमीरी समझने की। क्या कबीर बदला लेगा?या माफ करेगा? देखिए एक ऐसी कहानी…जहां “औकात” पैसे से नहीं, इंसानियत से तय होती है।
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