Khooya Hua Beta | खोया हुआ बेटा
आठ साल पहले बिछड़ा एक मासूम… और उसकी मां,जो रोज़ उसके सामने खड़ी होकर भीउसे पहचान नहीं पाई। संगम विहार की तंग गलियों मेंगंदे कपड़ों में सामान बेचता एक लड़का—जिसे सब शिवांश कहते थे। लेकिन अनन्या के लिए वह सिर्फ एक अनजान बच्चा था। जब तक कि एक दिनएक एक्सीडेंट ने सब कुछ बदल नहीं दिया। आईसीयू के बाहर बैठी मां…जिसे दुनिया के सामने कहना था—“वह लड़का मेरा बेटा है।” एक तरफ़ रिश्ता,दूसरी तरफ़ मातृत्व। जब शिवांश ने आंखें खोलींऔर कहा— “आंटी आप आ गई…” तब अनन्या ने रोते हुए कहा—“मैं आंटी नहीं… तुम्हारी मां हूं।” “Maa”एक ऐसी कहानी है जहांसमाज से बड़ा होता है मां का दिल। जहां रिश्ता टूट सकता है…लेकिन मां का साथ नहीं।
Review
Add Review
You have to Sign In to share the review

Not Rated Yet